उत्तर प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने निर्णायक रुख अपनाते हुए एक के बाद एक बड़ी कार्रवाइयां की हैं। अदालत, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त सख्ती से ड्रग नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।
जौनपुर में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई के मामले में जिला न्यायाधीश सुषील कुमार शशि ने सात आरोपियों—अरुण प्रकाश मौर्य, देवेश निगम, अनुप्रिया सिंह, सौरभ गुप्ता, मोहम्मद सलमान अंसारी, ओमप्रकाश मौर्य और संजीव चौरसिया—की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यह मामला संगठित नशा तस्करी से जुड़ा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
अदालत के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए 18 मेडिकल फर्मों—जिनमें पूर्वांचल एसोसिएट्स, निगम मेडिकल एजेंसी और गुप्ता ट्रेडिंग प्रमुख हैं—के ड्रग लाइसेंस रद्द कर दिए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ये फर्में नियमों के विपरीत कफ सिरप की आपूर्ति में संलिप्त पाई गईं।
इसी क्रम में इटावा में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में पुलिस व क्राइम ब्रांच टीम ने एक कंटेनर से 400 कार्टन प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद की, जिसकी बाजार कीमत लगभग 65 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने समस्तीपुर (बिहार) के तीन तस्करों को गिरफ्तार कर लिया है।
प्रशासन ने साफ किया है कि सभी मामलों में NDPS एक्ट की कठोर धाराओं में कार्रवाई होगी और नशा तस्करी से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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