डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और लगातार मोबाइल स्क्रीन पर चिपके रहने की आदत से परेशान कुछ युवाओं ने एक अनोखी पहल शुरू की है — ‘मौन पाठशाला’। इस अभियान के तहत सार्वजनिक जगहों पर छोटे-छोटे साइलेंट रीडिंग ज़ोन बनाए जा रहे हैं, जहाँ लोग बिना शोर-गुल और बिना मोबाइल के बैठकर किताबें पढ़ते हैं।
अभियान की शुरुआत कुछ दोस्तों ने सप्ताहांत पर की, जब उन्होंने पार्क की खाली बेंचों पर बोर्ड लगाया —
10 मिनट किताब के नाम, मोबाइल ऑफ — मन आराम

लोगों ने पहले संकोच किया, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे, कामकाजी लोग, बुज़ुर्ग और विद्यार्थी इन रीडिंग ज़ोन में बैठने लगे। यहाँ कोई माइक्रोफोन, भाषण या कार्यक्रम नहीं सिर्फ़ किताबें, शांति और पढ़ने का आनंद।
अभियान से जुड़े युवाओं का कहना है कि
उद्देश्य यह नहीं कि लोग मोबाइल छोड़ दें, बल्कि कुछ मिनट खुद के लिए निकालें — बिना नोटिफ़िकेशन, बिना हड़बड़ी।
रीडिंग ज़ोन में
– दान में मिली पुरानी किताबें
– बच्चों के चित्र-पुस्तक सेक्शन
– प्रेरक साहित्य
– लोककथाएँ और क्षेत्रीय भाषा की किताबें
सभी के लिए खुले हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ लोग अपनी पसंदीदा किताबें यहाँ छोड़ जाते हैं, ताकि कोई दूसरा उन्हें पढ़ सके। इसे युवाओं ने नाम दिया —
“बुक-पास फॉरवर्ड मूवमेंट”।
अब यह पहल अन्य इलाकों तक फैल रही है। कई अभिभावक इसे बच्चों के लिए लाभकारी बता रहे हैं —
“कम से कम कुछ समय मोबाइल से दूरी — यह बड़ी बात है।”
अभियान से जुड़ी टीम का कहना है कि आने वाले समय में
रविवार को ‘फैमिली रीडिंग आवर’ शुरू किया जाएगा, जिसमें परिवार एक साथ बैठकर किताबें पढ़ेंगे।
यह पहल इस बात का संदेश देती है कि
छोटे-छोटे प्रयास भी समाज में शांत, सकारात्मक और रचनात्मक बदलाव ला सकते हैं।

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