मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश (27 जनवरी 2026)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जुड़े हालिया नियमों को लेकर चल रही बहस अब मुज़फ्फरनगर में राजनीतिक टकराव का रूप लेती दिख रही है। करणी सेना के प्रदेश सचिव गौरव चौहान का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद विवाद गहरा गया। वीडियो में चौहान ने यूजीसी कानून के विरोध के संदर्भ में निजी प्रतिष्ठानों के बाहर ऐसे पोस्टर लगाने की बात कही, जिसे कई लोगों ने जातिगत आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बताया।
बयान सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने आपत्ति जताई। इस बीच शिवसेना मुज़फ्फरनगर इकाई भी खुलकर मैदान में आ गई। जिला अध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी कानून के विरोध का तरीका संविधान और सामाजिक सौहार्द के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान माहौल बिगाड़ सकते हैं और युवाओं में गलत संदेश भेजते हैं।
सिखेड़ा ने कहा कि मुज़फ्फरनगर ने पहले भी साम्प्रदायिक तनाव के दौर देखे हैं, इसलिए नेताओं को शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि वायरल वीडियो की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी संगठन सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाली भाषा का प्रयोग न करे।
वहीं, शहर में चौराहों, बाजारों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं। यूजीसी नियमों को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस का असर अब स्थानीय राजनीति पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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