मुज़फ़्फ़रनगर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वाहन फिटनेस व्यवस्था में किए गए बदलाव ने हजारों वाहन चालकों और परिवहन कारोबारियों की परेशानी बढ़ा दी है। केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर प्रदेश के 35 जिलों में अब मैनुअल फिटनेस प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। 1 जनवरी 2026 से वाहन की फिटनेस केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) से ही मान्य मानी जाएगी।
इस फैसले का सीधा असर मुज़फ़्फ़रनगर जिले के वाहन स्वामियों पर पड़ा है। जिले में एटीएस केंद्र न होने के कारण बस, ट्रक, टैक्सी, ई-रिक्शा और स्कूल वाहनों को फिटनेस जांच के लिए बिजनौर के किरतपुर भेजा जा रहा है। एक वाहन को फिटनेस कराने में पूरा दिन और अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
नई मशीन आधारित जांच प्रणाली में वाहन की ब्रेकिंग क्षमता, प्रदूषण नियंत्रण, लाइट बीम, स्टीयरिंग सिस्टम, सस्पेंशन और स्पीड गवर्नर की वैज्ञानिक जांच की जाती है। फिटनेस फेल होने पर वाहन सड़क पर चलने के योग्य नहीं माना जाएगा।
बिना फिटनेस वाहन चलाते पाए जाने पर पहली बार 5 हजार रुपये और दोबारा उल्लंघन पर 10 हजार रुपये तक का चालान किया जाएगा। ई-रिक्शा और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में शीघ्र एटीएस केंद्र स्थापित किया जाए, ताकि स्थानीय चालकों को राहत मिल सके।

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