नई दिल्ली। विमान यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किए गए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियम दिसंबर 2025 की शुरुआत में देश की विमानन व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आए। इन नए नियमों के लागू होते ही देश की कई प्रमुख एयरलाइनों, खासकर इंडिगो, की उड़ानों पर व्यापक असर पड़ा और हजारों यात्रियों को भारी असुविधा झेलनी पड़ी।

नए नियमों के तहत पायलटों के काम के घंटे सीमित कर दिए गए और उन्हें पहले की तुलना में अधिक विश्राम देना अनिवार्य कर दिया गया। साप्ताहिक अवकाश 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे किया गया, जबकि रात में लैंडिंग की संख्या भी घटा दी गई। इसके चलते एयरलाइनों के पास अचानक पर्याप्त पायलट उपलब्ध नहीं रहे और उड़ानों की समय-सारिणी पूरी तरह गड़बड़ा गई।

4 से 6 दिसंबर के बीच हालात सबसे ज्यादा बिगड़े, जब सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े हवाई अड्डों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। कई लोग घंटों तक एयरपोर्ट पर फंसे रहे, जबकि बड़ी संख्या में यात्रियों की व्यावसायिक और पारिवारिक यात्राएं प्रभावित हुईं। इससे एयरलाइनों को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

यात्रियों के भारी दबाव और बढ़ती अव्यवस्था को देखते हुए सरकार और DGCA को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ नियमों में अस्थायी ढील दी गई ताकि उड़ानों को धीरे-धीरे सामान्य किया जा सके। साथ ही प्रभावित यात्रियों को बिना अतिरिक्त शुल्क रिफंड और री-शेड्यूलिंग की सुविधा देने के निर्देश जारी किए गए।

फिलहाल विमान सेवाएं पहले से बेहतर स्थिति में लौट रही हैं, लेकिन यह संकट एयरलाइनों की तैयारी और व्यवस्था पर कई सवाल भी खड़े कर गया है।

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