लखनऊ, 3 फरवरी 26 — उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बेहद तीखा और स्पष्ट संदेश दिया। अपराध और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अपराधी खुलेआम गोली चलाने और पुलिस पर हमला करने से नहीं हिचकते, तब पुलिस से निष्क्रिय रहने की उम्मीद करना वास्तविकता से दूर है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी आम नागरिक की सुरक्षा है। यदि किसी मुठभेड़ जैसी स्थिति में पुलिस आत्मरक्षा या जनता की रक्षा के लिए बल प्रयोग करती है, तो उसे केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि कानून का राज कायम रखना सरकार की जिम्मेदारी है और पुलिस को कानूनी दायरे में रहते हुए कार्रवाई का पूरा अधिकार है।
मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिये विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल अपराधियों के प्रति “अनावश्यक सहानुभूति” दिखाकर पुलिस का मनोबल गिराने की कोशिश करते हैं। इसे राजनीतिक लाभ से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे बयान जमीन पर काम कर रही पुलिस फोर्स के लिए गलत संदेश देते हैं।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल के पुलिस एनकाउंटरों को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। अखिलेश यादव और उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी पहले भी कह चुके हैं कि किसी भी आरोपी को सज़ा देने का अधिकार अदालत को है, पुलिस को नहीं। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ गया है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार की नीति “कानून के बाहर जाकर कार्रवाई” की नहीं है, बल्कि अपराध के खिलाफ सख्त और कानूनी रुख की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में माफिया और संगठित अपराध पर लगाम लगाना उनकी सरकार की प्राथमिकता रही है और इसी कारण अपराध नियंत्रण के मामलों में पुलिस को खुला समर्थन दिया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक माहौल की भी झलक है। उत्तर प्रदेश में अपराध, सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई अब फिर से बड़ा चुनावी मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है, जहाँ सख्ती बनाम संवैधानिक प्रक्रिया की बहस तेज होना तय है।

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