प्रयागराज। माघ मेले के दौरान संगम क्षेत्र में ‘शंकराचार्य’ उपाधि को लेकर उठा विवाद अब प्रशासनिक रूप ले चुका है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने ज्योतिष पीठ से जुड़े संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को औपचारिक नोटिस जारी कर उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे किस आधार पर अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ शब्द का उपयोग कर रहे हैं।
प्राधिकरण का कहना है कि ज्योतिष पीठ के उत्तराधिकार से जुड़ा मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा स्वयं को अधिकृत शंकराचार्य बताना श्रद्धालुओं और आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। प्रशासन ने यह भी कहा कि माघ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में स्पष्टता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
यह पूरा मामला मौनी अमावस्या स्नान के दिन तब गरमाया जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का रथ संगम क्षेत्र में प्रवेश को लेकर प्रशासन से विवाद हुआ। प्रशासन ने इसे सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का मुद्दा बताते हुए प्रतिबंध लगाए, जबकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे सनातन परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करार दिया।
मेला प्राधिकरण ने अपने नोटिस में संत से 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब मांगा है। इस बीच साधु-संत समाज, विभिन्न अखाड़ों और धार्मिक संगठनों में इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। कई संतों ने इसे आस्था से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि कुछ ने प्रशासनिक नियमों का पालन जरूरी बताया है।
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के बीच यह उपाधि विवाद प्रशासन और धर्माचार्यों के संबंधों पर नए सवाल खड़े कर रहा है और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
