नई दिल्ली। राज्यसभा में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने आंगनवाड़ी, आशा वर्कर्स और सहायिकाओं की कार्य परिस्थितियों को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि ये महिलाएं देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था की पहली कड़ी हैं, लेकिन उन्हें न तो पर्याप्त वेतन मिलता है और न ही सामाजिक सुरक्षा।
सोनिया गांधी ने सदन को बताया कि कोविड काल से लेकर सामान्य दिनों तक, इन महिला कर्मियों ने लगातार जोखिम उठाकर काम किया है, लेकिन बदले में उन्हें कम मानदेय, अनियमित भुगतान और अत्यधिक कार्यभार झेलना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से केंद्रीय अंशदान बढ़ाने और मानदेय दोगुना करने पर विचार करने की मांग रखी।
उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि आईसीडीएस योजना के अंतर्गत लाखों पद खाली पड़े हैं, जिससे बच्चों और महिलाओं को पोषण व स्वास्थ्य सेवाएं समय पर नहीं मिल पा रही हैं।
सोनिया गांधी ने सुझाव दिया कि अधिक आबादी वाले गांवों में अतिरिक्त आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाए और आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत किया जाए।
उन्होंने कहा कि इन महिला कर्मियों को सम्मान और सुरक्षा देना, देश के सामाजिक विकास के लिए अनिवार्य है।
