मुज़फ्फरनगर : दहेज उत्पीड़न और विवाहिता की हत्या से जुड़े एक पुराने मामले में अदालत ने वर्षों बाद इंसाफ का ऐलान करते हुए दोषियों को कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में किसी भी तरह की नरमी समाज के लिए घातक होगी।
अदालत के फैसले के अनुसार, आरोपी पति शहज़ान को पत्नी आयशा की हत्या का दोषी मानते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई है। इसके साथ ही उसके ससुर सगीरुद्दीन और दो भाइयों आजाद व आरिफ को भी अपराध में सहभागिता का दोषी पाते हुए 10–10 वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई है। सभी दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
पूरा मामला क्या था
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आयशा की शादी के बाद से ही ससुराल में उससे दहेज की अतिरिक्त मांग की जा रही थी। कार और नकदी को लेकर लगातार मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी जाती रही। जब मांगें पूरी नहीं हुईं तो आयशा की हत्या कर दी गई और साक्ष्य मिटाने के लिए मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
अदालत की टिप्पणी
लंबी सुनवाई, गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि यह सुनियोजित हत्या का मामला है। न्यायालय ने कहा कि दहेज के नाम पर हिंसा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है।
फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली, वहीं सामाजिक संगठनों ने इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में अहम कदम बताया।
