मुज़फ्फ़रनगर | अपडेट: 29 जनवरी 2026
मुज़फ्फ़रनगर में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध का ऐलान कर दिया। पार्टी का कहना है कि हाल ही में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान उनके वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार किया गया, जिसे रालोद ने “लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ” बताया है।
कुकड़ा में हुई संगठनात्मक बैठक में रालोद नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर उनके प्रतिनिधियों को न तो प्रोटोकॉल के अनुरूप बैठने की व्यवस्था दी गई और न ही उन्हें अपेक्षित सम्मान मिला। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कृष्णपाल राठी ने कहा कि रालोद जनाधार वाली पार्टी है और उसके पदाधिकारियों की अनदेखी प्रशासनिक तानाशाही दर्शाती है।
बैठक में सुधीर भारती, रामनिवास पाल, धर्मेंद्र तोमर, संजय राठी और अन्य स्थानीय पदाधिकारी मौजूद रहे। नेताओं ने विशेष रूप से कुछ पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
रालोद ने प्रशासन को 48 घंटे का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई केवल संगठन के सम्मान की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की गरिमा से जुड़ी है।
फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
