लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के दौरान राज्य-भर में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि पुनरीक्षण के पहले चरण में जिले-जिले से मिली रिपोर्ट के आधार पर लगभग 2.89 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जबकि जिन प्रविष्टियों का सत्यापन अधूरा पाया गया है, ऐसे करीब 1.11 करोड़ मतदाताओं को दस्तावेज़ स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
निर्वाचन विभाग के अनुसार पुनरीक्षण के दौरान बीएलओ टीमों ने घर-घर पहुंचकर मतदाताओं का विवरण मिलान किया। इस दौरान ऐसे मतदाता, जो लंबे समय से अनुपस्थित मिले, दूसरे स्थान पर स्थानांतरित पाए गए, मृत घोषित हुए या जिनके नाम एक से अधिक बार दर्ज थे, उन्हें सूची से हटाने की कार्रवाई की गई। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल कटौती करना नहीं, बल्कि सूची को शुद्ध, पारदर्शी और वास्तविक मतदाता आधार के अनुरूप बनाना है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि संशोधित ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी, जिसके बाद जनता को दावे-आपत्तियाँ दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इस अवधि में कोई भी पात्र मतदाता, जिसका नाम सूची से हट गया है या जिसमें त्रुटि है, वह संबंधित प्रपत्र के माध्यम से सुधार या पुनः पंजीकरण का आवेदन कर सकेगा। विभाग द्वारा प्राप्त आपत्तियों और दस्तावेज़ों के आधार पर आगे सत्यापन किया जाएगा और अंतिम रूप से 28 फरवरी 2026 को पूरी तरह संशोधित मतदाता सूची जारी की जाएगी।
नवदीप रिणवा ने मतदाताओं से अपील की कि वे ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अपने नाम की स्थिति अवश्य जांचें और यदि आवश्यक हो तो निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि जो युवा मतदाता 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे भी पहली बार अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकते हैं और आगामी चुनावों में मतदान के पात्र बन सकते हैं।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि यह पुनरीक्षण अभियान आने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची को सटीक और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है, जिससे मतदान प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और विश्वसनीय बन सकेगी।

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