मुजफ्फरनगर, जिले में तापमान में लगातार गिरावट और आर्द्रता में बढ़ोतरी को देखते हुए रबी सीजन की प्रमुख फसलों—गेहूँ, सरसों, गन्ना, चना, मटर और आलू—में कीट एवं रोग प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने किसानों के लिए विस्तृत सलाह जारी की है।
उन्होंने बताया कि सरसों की फसल में बीज शोधन से लेकर पत्ती सुरंगक, पत्ती धब्बा और आरा मक्खी जैसे कीटों पर नियंत्रण के लिए समय पर दवाओं का छिड़काव आवश्यक है। मैन्कोजेब, जिनेब तथा डाईमिथेएट जैसी दवाओं के प्रयोग से रोग नियंत्रित किए जा सकते हैं।
गेहूँ फसल में अनावृत कंडुआ, करनाल बंट, दीमक व गुजिया जैसे कीटों से बचाव के लिए बीज शोधन और भूमि शोधन पर विशेष बल दिया गया है। खरपतवार नियंत्रण के लिए क्लोडिनाफाप और सल्फोसल्फ्यूरान मिश्रित दवाओं का छिड़काव दो पत्ती अवस्था में करने की सलाह दी गई है। साथ ही वर्षा के बाद पीलापन आने पर फेरस सल्फेट-यूरिया मिश्रण का प्रयोग लाभकारी बताया गया।
गन्ना फसल में टॉप बोरर के नियंत्रण हेतु ट्राइकोग्राम अंडों के तीन बार प्रयोग को प्रभावी बताया गया। दीमक नियंत्रण के लिए बीयूवेरिया बेसियाना व नीम खली का उपयोग सुझाया गया है, जबकि लाल सड़न रोग में प्रतिरोधी किस्में और एजोक्सीस्ट्रोबिन+डाईफेनोकोनाजोल का छिड़काव कारगर बताया गया।
आलू फसल में ब्लैक स्कर्फ और अगेती झुलसा रोग से बचाव हेतु प्रमाणित बीज, उचित दवा मिश्रण तथा इमिडाक्लोप्रिड द्वारा माहू नियंत्रण को महत्वपूर्ण बताया गया है।
इसके अलावा आम में लगने वाले मिली बग की रोकथाम के लिए तने पर पॉलीथिन पट्टी बाँधने तथा आवश्यक कीटनाशकों के छिड़काव की सलाह दी गई है।
कृषि रक्षा अधिकारी ने सभी प्रभारी कृषि रक्षा इकाइयों को निर्देशित किया है कि इन सुझावों का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार NPSOS ऐप, समाचार पत्रों, एडवाइजरी, गोष्ठियों और कृषि मेलों के माध्यम से किया जाए, ताकि किसान समय रहते आवश्यक बचाव कर सकें।
