लखनऊ। राजधानी में वर्ष 2020 के एक चर्चित सरिया चोरी प्रकरण में बड़ा मोड़ आया है। एंटी-करप्शन संगठन की विस्तृत जांच के बाद यह सामने आया कि बंथरा थाना क्षेत्र में व्यापारी विकास गुप्ता और उसके चालक दर्शन लाल को जिस मामले में गिरफ्तार किया गया था, वह पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी रूप से तैयार किया गया केस था।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद लखनऊ के पीजीआई थाने में पाँच पुलिसकर्मियों — प्रह्लाद सिंह, दिनेश कुमार, संतोष कुमार, राजेश कुमार और आलोक श्रीवास्तव — के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच में पाया गया कि 31 दिसंबर 2020 की रात पुलिस टीम ने “चोरी की सरिया बरामद होने” का दावा किया था और विकास गुप्ता को चोरी का माल खरीदने का आरोपी बताते हुए हिरासत में लिया गया। जबकि व्यापारी ने उस समय ही सरिया खरीदी के वैध बिल और भुगतान रसीदें प्रस्तुत कर दी थीं। इसके बावजूद पुलिस ने न केवल उसकी बात अनसुनी की, बल्कि कथित ‘गुडवर्क’ दिखाने के लिए घटना को योजनाबद्ध तरीके से गंभीर अपराध का रूप दिया।
ACO की तीन साल चली जांच में खुलासा हुआ कि केस बनाने के लिए फर्जी बयान, झूठे साक्ष्य, और गलत बरामदगी मेमो तैयार किए गए थे। रिपोर्ट में उल्लेख है कि केस की पूरी कहानी पुलिस स्टेशन में ही बैठकर गढ़ी गई और फिर मौके की कार्रवाई दिखाकर व्यापारी को जेल भेजा गया।
व्यापारी विकास गुप्ता ने इसे अपनी प्रतिष्ठा पर गहरी चोट बताते हुए कहा कि इस झूठे मामले के कारण उनका व्यापार प्रभावित हुआ और परिवार को सामाजिक दबाव झेलना पड़ा। चालक दर्शन लाल ने भी पुलिस पर जबरन दबाव डालकर गलत बयान लिखाने का आरोप लगाया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पाँचों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अधिकारी ने बताया कि केस अब आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका, फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने और झूठा केस बनाने की मंशा की दिशा में आगे बढ़ेगा।
