लखनऊ, उत्तर प्रदेश। प्रदेश सरकार प्रशासनिक ढांचे को परिणाम आधारित बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में वित्त विभाग और अन्य प्रमुख विभागों की समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी विभाग आगामी वित्तीय वर्ष की वार्षिक कार्ययोजनाएँ 15 अप्रैल 2026 तक स्वीकृत कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि योजनाओं के प्रारंभिक स्तर पर ही देरी होने से बजट खर्च की रफ्तार धीमी पड़ती है और विकास कार्यों का असर जनता तक समय पर नहीं पहुँच पाता। बैठक में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, अपर मुख्य सचिव वित्त एस. राधा चौहान, योजना विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा कई विभागों के प्रमुख सचिव उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने वित्तीय स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अनावश्यक फाइलिंग और स्तरों की देरी कम की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं की लागत तय सीमा से अधिक बढ़ती है, वहाँ कारणों की गहन समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाए। मानदेय आधारित कर्मचारियों जैसे आशा कार्यकत्रियों और आंगनवाड़ी कर्मियों के भुगतान में देरी पर भी मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई और समयबद्ध डीबीटी भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि योजनाएँ कागज़ से निकलकर तय समय में जमीन पर दिखाई दें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Join WhatsApp Group