देश की न्यायिक व्यवस्था में सोमवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ, जब न्यायमूर्ति सूर्या कांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के साथ ही न्यायमूर्ति कांत ने औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्च ज़िम्मेदारियाँ अपने हाथों में ले लीं।
न्यायमूर्ति सूर्या कांत अपने सटीक फैसलों, संवेदनशील दृष्टिकोण और न्यायिक सुधारों की स्पष्ट सोच के लिए पहचाने जाते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उनके कार्यकाल में टेक्नोलॉजी-आधारित न्याय और लंबित मामलों को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम देखने को मिल सकते हैं। उनका कार्यकाल लगभग 15 महीनों का होगा, जिसे न्यायालय जगत के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी. आर. गवई की जगह पदभार ग्रहण किया। समारोह में केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के जजों और देशभर के नामी विधि विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। जस्टिस कांत के पद संभालते ही कानूनी जगत में नई उम्मीदों और बदलते न्यायिक माहौल की चर्चा तेज हो गई है।

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