
संभल (उत्तर प्रदेश) सराय तारिन क्षेत्र में 47 साल बाद अचानक सामने आए एक पुराने कुएँ ने 1978 दंगे की दर्दनाक यादों को फिर जगा दिया है। वर्षों से लापता व्यापारी रामशरण रस्तोगी के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद प्रशासन ने गुरुवार को कुएँ की आधिकारिक खुदाई शुरू कराई। परिवार का दावा है कि दंगे के दौरान हत्या कर शव इसी कुएँ में फेंका गया था, लेकिन तब से आज तक यह स्थान मिट्टी और मलबे में दबा रहा।
नगर पालिका की स्टाफ टीम, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी में खुदाई का काम सुरक्षा घेरे के बीच कराया जा रहा है। कुएँ के ऊपर जमा भारी मलबे को हटाने का कार्य जारी है। अधिकारियों के अनुसार कुएँ के भीतर किसी प्रकार के अवशेष का मिलना या न मिलना, फिलहाल स्पष्ट नहीं है। वैज्ञानिक तरीके से जांच के बाद ही कोई निष्कर्ष सामने आएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 1978 के दंगे ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया था और अनेक परिवार तबाह हो गए थे। कई लोग लापता हुए, जिनमें व्यापारी रस्तोगी भी शामिल थे। परिवार वर्षो से उनकी मौत और संभावित स्थान की जांच की माँग करता रहा है। अब इस खुदाई से उम्मीदें बढ़ गई हैं कि घटना की वास्तविकता सामने आ सकेगी।
प्रशासन ने कहा है कि खुदाई पूरी होने तक किसी भी तरह की अफवाह या अनुमान से बचना आवश्यक है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखा जा रहा है और हर चरण की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
