नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सदन में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब उत्तर प्रदेश की सांसद इकरा हसन ने लोकसभा अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विपक्षी सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर दी। उनके इस बयान के बाद सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तेज हो गई।
सदन की कार्यवाही के दौरान बोलने का अवसर न मिलने का आरोप लगाते हुए इकरा हसन ने कहा कि विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब विपक्षी सदस्य अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं तो उन्हें व्यवधानों और टोकाटाकी का सामना करना पड़ता है। इसी संदर्भ में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अपील की कि विपक्षी सांसदों को बोलने का समान अवसर और सुरक्षा का आश्वासन मिलना चाहिए।
उनके बयान के बाद विपक्षी दलों के कई सदस्यों ने समर्थन जताया, जबकि सत्ता पक्ष के सांसदों ने आरोपों को निराधार बताया। सदन में कुछ समय के लिए शोर-शराबा भी हुआ, जिसके चलते कार्यवाही बाधित रही।
संसदीय कार्यमंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, लोकसभा की कार्यवाही नियमों के तहत संचालित होती है और सभी सदस्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बोलने का अवसर दिया जाता है। फिर भी विवाद बढ़ने के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है।
