नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026। देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की  संसद भवन में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में संविधान संशोधन विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा कानूनी विशेषज्ञों के विचार सुने गए।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष एवं सांसद पी.पी. चौधरी ने की। इस दौरान पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवै ने समिति के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रस्तावित संविधान संशोधन देश के संविधान के ‘मूल ढांचे’ (बेसिक स्ट्रक्चर) का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव एक साथ कराने का उद्देश्य प्रशासनिक समन्वय और संसाधनों की बचत है, न कि संघीय ढांचे या लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती।
सूत्रों के अनुसार बैठक में इस बात पर भी विचार हुआ कि यदि लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल में असमानता हो तो उसे कैसे समायोजित किया जाए। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि आवश्यक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से चुनाव चक्र को चरणबद्ध तरीके से समान किया जा सकता है।
समिति के कुछ सदस्यों ने विपक्ष की आशंकाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें संघीय ढांचे पर प्रभाव, राज्यों की स्वायत्तता और अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति जैसे मुद्दे शामिल हैं। इस पर विशेषज्ञों ने कहा कि लोकतांत्रिक जवाबदेही की व्यवस्थाएं यथावत रहेंगी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही कोई भी परिवर्तन किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि समिति आगामी बैठकों में चुनाव आयोग, विधि आयोग और अन्य संवैधानिक विशेषज्ञों से भी राय लेगी। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संसद के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद विधेयक पर अंतिम निर्णय होगा।
फिलहाल ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू नहीं हुआ है, लेकिन JPC की लगातार बैठकों से संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से आगे बढ़ रही है।

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