मुज़फ़्फ़रनगर। आसान शर्तों पर तुरंत लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम ठगने वाले दो शातिर युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी अपनी असली पहचान छुपाकर अलग–अलग नामों से लोगों से संपर्क करते थे और खुद को निजी फाइनेंस कंपनी का अधिकारी बताते थे। मामला तब खुला जब बुढ़ाना क्षेत्र के एक पीड़ित ने हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये ठगे जाने की शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का संचालन गाज़ियाबाद से किया जा रहा था, जबकि शिकार मुज़फ़्फ़रनगर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बनाए जा रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में सोनू उर्फ आशीष गुप्ता उर्फ विशाल नेहरा और सागर प्रताप सैनी शामिल हैं। सागर प्रताप सैनी मूल रूप से गाज़ियाबाद के गोविंदपुरम क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। पुलिस के अनुसार सोनू कई फर्जी पहचान पत्रों के सहारे बैंक खाते खुलवाता था और उन्हीं खातों में ठगी की रकम मंगवाई जाती थी।
जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी पहले मोबाइल पर संपर्क कर पीड़ित को भरोसे में लेते थे। वे कहते थे कि कम ब्याज दर पर तुरंत पर्सनल लोन स्वीकृत हो गया है। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, बीमा, जीएसटी और सुरक्षा राशि जैसे अलग–अलग बहाने बनाकर किस्तों में पैसा ट्रांसफर करवाया जाता था। रकम मिलते ही आरोपी नंबर बंद कर देते और नया सिम लेकर फिर से ठगी शुरू कर देते थे। बातचीत के लिए इंटरनेट कॉलिंग और मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया जाता था ताकि लोकेशन ट्रेस करना कठिन हो।
इस गिरोह की बड़ी ठगी का शिकार बजाज हिंदुस्तान शुगर मिल से जुड़े एक अधिकारी भी बने, जिनसे करीब चार लाख रुपये अलग–अलग चरणों में ऐंठ लिए गए। जब लोन की रकम खाते में नहीं आई और संपर्क टूट गया तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, विभिन्न नामों के आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंक दस्तावेज और नकदी बरामद की है। शुरुआती जांच में कई संदिग्ध बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की जानकारी भी मिली है, जिनकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का मानना है कि गिरोह ने और भी लोगों को इसी तरीके से निशाना बनाया हो सकता है।
