नई दिल्ली | 1 फ़रवरी 2026। केंद्र सरकार ने आज संसद में वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए साफ कर दिया कि आने वाला साल इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी ग्रोथ के नाम रहेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में बड़े निवेश, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत को रफ्तार देने पर जोर दिया।
हालांकि मध्यम वर्ग को इनकम टैक्स स्लैब में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन इस मोर्चे पर निराशा हाथ लगी। दूसरी ओर उद्योग, स्टार्टअप और उत्पादन क्षेत्र के लिए कई बड़े प्रावधान किए गए हैं।
🚧 इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च
सरकार ने पूंजीगत व्यय (Capex) को ऐतिहासिक स्तर तक बढ़ाने का ऐलान किया है। इसका सीधा मतलब है कि सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स, शहरी विकास और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर तेज़ी से काम होगा। इससे निर्माण क्षेत्र में गतिविधि बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है।
🏭 मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी को बड़ा बूस्ट
बजट में भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम कदम उठाए गए हैं।
सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की गई है। सरकार का फोकस साफ है — आयात कम, घरेलू उत्पादन ज्यादा।
MSME सेक्टर के लिए भी विशेष फंड और आसान कर्ज की सुविधा का प्रावधान किया गया है, जिससे छोटे उद्योग विस्तार कर सकें और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़े।
📈 शेयर बाजार के लिए क्या बदला?
इस बजट में शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों को बड़ा झटका लगा है।
डेरिवेटिव (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है, जिससे एक्टिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी।
साथ ही, कंपनियों द्वारा किए जाने वाले शेयर बायबैक पर टैक्स नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे इस माध्यम से होने वाली कमाई पर टैक्स बोझ बढ़ सकता है।
🌍 विदेश खर्च पर राहत
विदेश यात्रा, पढ़ाई और इलाज पर लागू TCS (Tax Collected at Source) की दरों में कमी की गई है। इससे विदेश में खर्च करने वाले लोगों को कुछ कर राहत मिलेगी।
💊 स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए राहत
सरकार ने कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट देने की घोषणा की है। इससे आयातित जीवनरक्षक दवाएं सस्ती हो सकती हैं और मरीजों को राहत मिल सकती है।
