लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में व्यापक स्तर पर कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए पांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले और नई तैनाती के आदेश जारी किए हैं। जारी सूची के अनुसार कई संवेदनशील और रणनीतिक पदों पर अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस फेरबदल को उत्तर प्रदेश पुलिस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

👉अखिलेश चौरसिया को डीआईजी स्थापना का प्रभार

आईपीएस अधिकारी अखिलेश कुमार चौरसिया को पुलिस मुख्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें अब पुलिस उपमहानिरीक्षक (स्थापना) के पद पर तैनात किया गया है। इससे पहले वे भ्रष्टाचार निवारण संगठन में तैनात थे। नई भूमिका में वे पुलिस मुख्यालय लखनऊ में कार्मिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अहम निर्णयों की निगरानी करेंगे।

👉एसटीएफ को मिला नया नेतृत्व

आईपीएस अधिकारी सुशील चंद्रभान घुले को विशेष कार्य बल यानी उत्तर प्रदेश एसटीएफ में डीआईजी स्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि संगठित अपराध और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच में उनके अनुभव का लाभ विभाग को मिलेगा।

👉यमुना प्रसाद पहुंचे पीटीएस मुरादाबाद

अब तक गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट में तैनात रहे आईपीएस अधिकारी यमुना प्रसाद को पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में नई तैनाती दी गई है। वे अब पीटीएस मुरादाबाद में पुलिस उपमहानिरीक्षक के रूप में प्रशिक्षण व्यवस्था की कमान संभालेंगे। इससे पहले वे गौतमबुद्धनगर में कानून व्यवस्था से जुड़े दायित्व निभा रहे थे।

👉हेमराज मीणा को विशेष जांच इकाई में जिम्मेदारी

आईपीएस हेमराज मीणा को पुलिस मुख्यालय से हटाकर विशेष जांच एवं बल सहायता से जुड़े विभाग में डीआईजी पद पर तैनात किया गया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब तकनीकी और संगठित अपराधों की जांच को लेकर विभाग विशेष रणनीति पर काम कर रहा है।

👉सचिन्द्र पटेल लखनऊ में भ्रष्टाचार निवारण संगठन में तैनात

44वीं वाहिनी पीएसी, मेरठ में सेनानायक के पद पर तैनात रहे आईपीएस अधिकारी सचिन्द्र पटेल को अब भ्रष्टाचार निवारण संगठन में डीआईजी के रूप में नियुक्त किया गया है। उन्हें वित्तीय अनियमितताओं और विभागीय जांच से जुड़े मामलों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

👉प्रशासनिक मजबूती की दिशा में कदम

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह फेरबदल पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, चुस्त और परिणामोन्मुख बनाने की रणनीति का हिस्सा है। प्रशिक्षण, जांच और विशेष अभियानों से जुड़े विभागों में अनुभवी अधिकारियों की तैनाती से आने वाले समय में अपराध नियंत्रण और आंतरिक प्रशासनिक समन्वय में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा किए गए इस बदलाव को पुलिस महकमे में कार्यकुशलता बढ़ाने और संवेदनशील इकाइयों को मजबूत नेतृत्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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