मुजफ्फरनगर मूल निवासी और वर्तमान में लखनऊ में तैनात पुलिस उपनिरीक्षक धर्मेंद्र कुमार उस समय हैरान रह गए जब कर विभाग से उन्हें भारी वित्तीय लेनदेन संबंधी नोटिस प्राप्त हुआ। जांच में सामने आया कि उनके पैन कार्ड का इस्तेमाल कर राजधानी से दूर दिल्ली में एक फर्जी व्यापारिक फर्म संचालित दिखाई गई, जिसके नाम पर लगभग 10.5 करोड़ रुपये का कारोबार दर्शाया गया।
दरोगा के अनुसार उन्होंने न तो कोई कंपनी बनाई और न ही किसी व्यावसायिक गतिविधि में भाग लिया। नोटिस मिलने के बाद उन्होंने तुरंत वस्तु एवं सेवा कर विभाग और आयकर विभाग से संपर्क कर पूरे मामले को धोखाधड़ी बताया। प्रारंभिक पड़ताल में यह आशंका जताई जा रही है कि किसी साइबर गिरोह ने दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यह फर्जी पंजीकरण कराया।
धर्मेंद्र कुमार ने अपने गृह जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने जांच क्राइम शाखा को सौंपी है, जिसकी निगरानी इंदु सिद्धार्थ कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों, जीएसटी रजिस्ट्रेशन और डिजिटल दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कर असली संचालकों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
गांव तितावी के रहने वाले दरोगा ने कहा कि इस घटना से उनकी व्यक्तिगत साख को भी ठेस पहुंची है। पुलिस अब आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर साइबर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह कोई संगठित गिरोह हो सकता है जो निर्दोष लोगों के पहचान दस्तावेजों के सहारे फर्जी कारोबार खड़ा कर रहा है।

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