वॉशिंगटन, डी.सी. अमेरिका में व्यापार नीति को लेकर एक नया राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे “शर्मनाक और देशहित के विपरीत” बताया है। मामला उन वैश्विक आयात शुल्क (टैरिफ) प्रावधानों से जुड़ा है, जिन्हें अदालत ने असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय Supreme Court of the United States द्वारा दिया गया, जिसमें पूर्व प्रशासन की ओर से प्रस्तावित व्यापक ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ नीति पर रोक लगा दी गई। इस नीति के तहत अमेरिका कुछ देशों पर 18 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की तैयारी में था। अदालत का मत था कि इस प्रकार के व्यापक आर्थिक निर्णय के लिए कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी आवश्यक है।
फैसले के बाद जारी बयान में ट्रंप ने कहा कि न्यायालय का यह कदम अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा और घरेलू उद्योगों के हितों को कमजोर करेगा। उन्होंने दावा किया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में कठोर टैरिफ नीति अमेरिकी श्रमिकों और विनिर्माण क्षेत्र के लिए जरूरी है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वे वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों के तहत सीमित अवधि के लिए आयात शुल्क लागू करने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल आर्थिक नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी अहम बहस छेड़ रहा है। जहां ट्रंप समर्थक इस फैसले को उद्योग-विरोधी बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और संवैधानिक विशेषज्ञ इसे शक्तियों के संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इस घटनाक्रम का असर देखने को मिला। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में शुरुआती उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, क्योंकि निवेशक अमेरिका की आगामी व्यापार नीति को लेकर असमंजस में हैं। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका पुनः उच्च टैरिफ लागू करता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और निर्यात-आयात संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है।
वॉशिंगटन में राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा चुनावी बहस का प्रमुख विषय बन सकता है। फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रंप और उनके समर्थक कानूनी विकल्पों का किस तरह उपयोग करते हैं और कांग्रेस की भूमिका क्या रहती है।
