शामली, 22 फरवरी26। जनपद शामली के कंडैला औद्योगिक क्षेत्र में मिलावटी पनीर बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री का खुलासा होने से हड़कंप मच गया। कार्रवाई सहारनपुर मंडल से आई खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम ने की। टीम ने मौके से भारी मात्रा में तैयार पनीर, संदिग्ध दूध तथा रासायनिक पदार्थ बरामद कर नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए।
जांच में सामने आया कि संबंधित इकाई का खाद्य लाइसेंस करीब छह माह पूर्व निरस्त किया जा चुका था, इसके बावजूद उत्पादन कार्य बंद नहीं किया गया। फैक्ट्री में प्रतिदिन बड़े स्तर पर पनीर तैयार कर स्थानीय बाजारों और आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई किया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान टीम को ऐसे पाउडर और रसायन भी मिले जिनका उपयोग दूध को गाढ़ा करने और पनीर को अधिक सफेद व ताजा दिखाने के लिए किया जाता है। प्रारंभिक तौर पर उत्पाद की गुणवत्ता संदिग्ध पाई गई है। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ कर अभिलेख जब्त किए।
सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद फैक्ट्री कैसे संचालित होती रही। औद्योगिक क्षेत्र में बड़े स्तर पर उत्पादन के बाद भी स्थानीय खाद्य सुरक्षा तंत्र की निगरानी क्यों प्रभावी नहीं रही। मंडलीय टीम की कार्रवाई के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावटी पनीर के सेवन से फूड पॉयजनिंग, पेट संबंधी संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। शादी-समारोह और आयोजनों के मौसम में इस तरह की मिलावट आमजन के लिए गंभीर जोखिम बन सकती है।
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर संचालक के विरुद्ध अभियोजन और आर्थिक दंड का प्रावधान है।

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