मेरठ, 25 फरवरी। शहर के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर 30 लाख रुपये हड़पने की कोशिश की। हालांकि समय रहते की गई शिकायत के चलते पुलिस ने पूरी धनराशि को बैंक खातों में फ्रीज करा लिया, जिससे पीड़िता को बड़ी राहत मिली।
जानकारी के अनुसार, ब्रह्मपुरी क्षेत्र निवासी 64 वर्षीय सुदेश रानी के मोबाइल फोन पर कुछ दिन पहले एक वीडियो कॉल आई। कॉल करने वालों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनका बेटा एक बड़े ड्रग्स मामले में फंस गया है और उसे तत्काल गिरफ्तार किया जा सकता है। आरोपियों ने महिला को घर से बाहर न निकलने और किसी से बात न करने की हिदायत दी, जिसे उन्होंने ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ बताया।
ठगों ने महिला को डराकर कहा कि मामले को रफा-दफा करने के लिए 30 लाख रुपये तुरंत एक बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करने होंगे। बेटे की चिंता में घबराई महिला ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर आरटीजीएस के जरिए पूरी रकम भेज दी।
कुछ देर बाद जब महिला ने अपने बेटे से सीधे बात की तो सच्चाई सामने आई कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके बाद उसने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और ब्रह्मपुरी थाने में सूचना दी।
मेरठ पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने तेजी दिखाते हुए संबंधित बैंक से संपर्क किया और ट्रांसफर की गई पूरी राशि को संदिग्ध खातों में फ्रीज करा दिया। अधिकारियों के मुताबिक, समय पर कार्रवाई होने से महिला की रकम सुरक्षित बच गई।
पुलिस अधीक्षक (साइबर) ने बताया कि इस तरह के मामलों में ठग सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं और लोगों को डराकर पैसे ट्रांसफर कराते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें, न ही बैंक संबंधी जानकारी साझा करें। संदेह होने पर तुरंत 1930 नंबर या नजदीकी थाने में संपर्क करें।
पुलिस मामले की जांच कर रही है और जिन खातों में रकम भेजी गई, उनके आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।

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