नई दिल्ली। देश में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में आयोजित एक सड़क सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि नशे की हालत में ड्राइविंग को अब केवल जुर्माने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि आदतन उल्लंघन करने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस को स्थायी रूप से निरस्त करने की व्यवस्था भी लागू की जा सकती है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि देशभर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में एक बड़ा प्रतिशत मामलों में शराब का सेवन एक प्रमुख कारण बनकर सामने आता है। मौजूदा प्रावधानों के तहत मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के अंतर्गत यदि चालक के रक्त में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई जाती है तो उसे दंडित किया जाता है। पहली बार पकड़े जाने पर भारी जुर्माना और कारावास का प्रावधान है, जबकि दोबारा उल्लंघन की स्थिति में सजा और कड़ी हो जाती है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार अब एक सख्त अंक-आधारित प्रणाली लागू करने पर भी विचार चल रहा है, जिसमें बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने पर लाइसेंस पर नकारात्मक अंक जुड़ते जाएंगे। निर्धारित सीमा पार करते ही लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकेगा। मंत्रालय का मानना है कि आर्थिक दंड के साथ-साथ लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई ही प्रभावी निवारक सिद्ध हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नशे में ड्राइविंग केवल चालक ही नहीं, बल्कि अन्य राहगीरों और परिवारों के लिए भी गंभीर खतरा बनती है। सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी में हैं, जिसमें सख्त जांच, जागरूकता कार्यक्रम और तकनीकी निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा।
