तेहरान/वॉशिंगटन/यरूशलम, 28 फरवरी 2026। मध्य-पूर्व में लंबे समय से simmer कर रहा तनाव शनिवार को खुले सैन्य टकराव में बदल गया, जब इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान के विभिन्न सामरिक ठिकानों पर व्यापक हमला कर दिया। राजधानी तेहरान में देर रात कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में धुएं के घने गुबार उठते दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आसमान में लगातार चमकती रोशनी और वायु रक्षा प्रणाली की सक्रियता से पूरा इलाका युद्धक्षेत्र जैसा प्रतीत हो रहा था।
सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि करीब 30 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें सैन्य अड्डे, संचार नेटवर्क और कथित रणनीतिक सुविधाएं शामिल हैं। हमलों में क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल की चर्चा है, हालांकि आधिकारिक स्तर पर विस्तृत सैन्य विवरण साझा नहीं किया गया है। इज़राइल की ओर से इसे पूर्व-खतरों को निष्क्रिय करने की कार्रवाई बताया गया है, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने सुरक्षा सहयोग के तहत अपनी भागीदारी स्वीकार की है।
इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से जुड़े परिसरों को भी निशाना बनाए जाने की अटकलें तेज हैं, हालांकि इस संबंध में कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ईरानी अधिकारियों ने हमले को खुली आक्रामकता करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है और देशभर में रक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि वायु सुरक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया।
घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है। कूटनीतिक हलकों में यह आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात जल्द काबू में नहीं आए तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।
फिलहाल स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और दुनिया की निगाहें तेहरान की संभावित प्रतिक्रिया तथा वॉशिंगटन और यरूशलम की अगली रणनीति पर टिकी हैं।
