लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गर्मी का मौसम पूरी तरह शुरू होने से पहले ही बिजली की खपत तेजी से बढ़ने लगी है। प्रदेश में बिजली की मांग ने हाल के दिनों में नया रिकॉर्ड बनाया है, जिससे ऊर्जा विभाग और पावर कॉरपोरेशन ने आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले महीनों में तापमान बढ़ने के साथ-साथ बिजली की खपत और अधिक बढ़ने की संभावना है।
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हाल ही में प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 30 हजार मेगावाट से अधिक दर्ज की गई, जो इस समय के लिहाज से अब तक का सबसे अधिक स्तर माना जा रहा है। विभाग का अनुमान है कि मई-जून की भीषण गर्मी के दौरान यह मांग 32 से 33 हजार मेगावाट तक पहुंच सकती है।
बिजली की बढ़ती खपत के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। राज्य में लगातार बढ़ रहे शहरीकरण, औद्योगिक इकाइयों के विस्तार और एयर कंडीशनर, कूलर व अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते उपयोग से बिजली की खपत में तेजी आई है। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में नए घरेलू और व्यावसायिक बिजली कनेक्शन भी जारी किए गए हैं, जिससे मांग का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है।
ऊर्जा विभाग और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने स्थिति को देखते हुए आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। बिजली उत्पादन इकाइयों को पूरी क्षमता से चलाने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही आवश्यकता पड़ने पर पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदने की योजना भी बनाई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के चरम समय में मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे कई बार ट्रांसफार्मरों और फीडरों पर लोड बढ़ने से तकनीकी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। ऐसे में बिजली निगम द्वारा ट्रांसमिशन और वितरण तंत्र की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक कटौती का सामना न करना पड़े।
ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में बिजली की मांग का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है और इसे देखते हुए उत्पादन, खरीद और वितरण तीनों स्तरों पर विशेष रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि गर्मी के मौसम में प्रदेश के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुचारु बनी रहे।
