नई दिल्ली। देश के चर्चित ‘गैन बिटकॉइन’ क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि निवेशकों को बिटकॉइन में भारी मुनाफे का लालच देकर हजारों करोड़ रुपये की ठगी की गई। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान आयुष वर्श्नेय के रूप में हुई है, जो डार्विन लैब्स नामक कंपनी का सह-संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी (CTO) बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा मामला कथित तौर पर ‘गैन बिटकॉइन’ नामक निवेश योजना से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत कुछ वर्ष पहले की गई थी। योजना में लोगों को भरोसा दिलाया गया कि यदि वे बिटकॉइन में निवेश करेंगे तो उन्हें हर महीने लगभग 10 प्रतिशत तक रिटर्न मिलेगा। इस लालच में देश के विभिन्न राज्यों के हजारों लोगों ने अपनी जमा-पूंजी निवेश कर दी।
CBI की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस योजना के माध्यम से निवेशकों से भारी रकम जुटाई गई और बाद में उन्हें वास्तविक बिटकॉइन के स्थान पर कम मूल्य वाली दूसरी डिजिटल करेंसी देकर भुगतान करने की कोशिश की गई। इससे निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि इस घोटाले की रकम लगभग 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
सूत्रों के मुताबिक आयुष वर्श्नेय लंबे समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में था। उसके खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर भी जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि वह विदेश जाने की कोशिश में था, तभी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हवाई अड्डे पर पकड़ लिया। इसके बाद CBI ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की और औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
CBI अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि ठगी से जुटाई गई रकम किन-किन खातों और डिजिटल वॉलेट्स के जरिए इधर-उधर भेजी गई।
इस बहुचर्चित क्रिप्टो घोटाले को लेकर देश के कई राज्यों में पहले भी मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
