नई दिल्ली। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी नई दिल्ली में होने वाले एक राष्ट्रीय तकनीकी सम्मेलन में भारत का नया बहुभाषी एआई मॉडल ‘परम-2’ पेश किया जाएगा। यह मॉडल खास तौर पर भारतीय जरूरतों और भाषाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
जानकारी के अनुसार, ‘परम-2’ लगभग 17 अरब पैरामीटर पर आधारित एक उन्नत प्रणाली है। इसे इस तरह बनाया गया है कि यह हिंदी, संस्कृत, उर्दू, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती समेत 22 भारतीय भाषाओं में काम कर सके। इसका उद्देश्य है कि देश के अलग-अलग राज्यों के लोग अपनी मातृभाषा में डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकें।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी कामकाज, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि सलाह जैसे क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित होगा। उदाहरण के लिए, किसान अपनी भाषा में फसल संबंधी जानकारी ले सकेंगे, छात्र पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे और आम नागरिक सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से समझ सकेंगे।
‘परम-2’ को देश में ही विकसित किया गया है और इसमें भारतीय डाटा का उपयोग किया गया है, ताकि इसके जवाब भारतीय समाज और संस्कृति के अनुरूप हों। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम होगी और देश का डाटा देश में ही सुरक्षित रहेगा।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मॉडल डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यदि योजना के अनुसार इसका विस्तार हुआ, तो भारत एआई तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम रख सकेगा।
स्पष्ट है कि ‘परम-2’ केवल एक नया तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि डिजिटल भारत के सपने को आगे बढ़ाने वाला एक बड़ा प्रयास है।
