मुजफ्फरनगर। जनपद में जल संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) गजेन्द्र कुमार ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को पत्र जारी कर बैठकों और सरकारी कार्यक्रमों में पानी की बोतलों की बर्बादी रोकने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों का स्तर लगातार गिर रहा है, ऐसे में पानी की एक-एक बूंद बचाना जरूरी हो गया है।
एडीएम ने अपने पत्र में कहा कि अक्सर सरकारी बैठकों, सेमिनार और कार्यक्रमों में छोटी पानी की बोतलें रखी जाती हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश बोतलों का पानी पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता। कई बार अधिकारी और कर्मचारी आधी या उससे भी कम पानी पीकर बोतल छोड़ देते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ चला जाता है। यह न केवल जल की बर्बादी है बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी बताया कि आरओ प्रणाली से एक लीटर शुद्ध पानी तैयार करने में लगभग तीन लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। ऐसे में अगर बोतलों में बचा पानी फेंक दिया जाता है तो वास्तव में उससे कई गुना अधिक पानी व्यर्थ चला जाता है।
अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी बैठक या कार्यक्रम में पानी की बोतल उपलब्ध कराई जाए तो उसका पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी कारणवश पूरी बोतल का पानी इस्तेमाल नहीं हो पाता तो संबंधित व्यक्ति बोतल को अपने साथ ले जाए ताकि बाद में उसका उपयोग किया जा सके। साथ ही अधिकारियों से कहा गया है कि जहां संभव हो वहां बोतलों के स्थान पर गिलास और फिल्टर पानी की व्यवस्था की जाए।
इसके अलावा सभी सरकारी कार्यालयों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सूचना पट्ट लगाने को भी कहा गया है, जिन पर “जल ही जीवन है, इसका सम्मान करें” जैसे संदेश अंकित हों।
एडीएम गजेन्द्र कुमार ने अपील की है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी जल संरक्षण को अपनी आदत बनाएं तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें, ताकि मिलकर पानी बचाने की दिशा में सार्थक कदम उठाया जा सके।

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