पटना। बिहार में राज्यसभा की पांच रिक्त सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज कर ली। नामांकन प्रक्रिया और राजनीतिक समीकरणों के बीच यह साफ हो गया कि एनडीए के सभी पांचों प्रत्याशी निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होंगे। इस परिणाम के बाद बिहार की राजनीति में एनडीए की संगठनात्मक मजबूती एक बार फिर स्पष्ट दिखाई दी।
राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संजय मयूख को उम्मीदवार बनाया गया था, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) ने संजय झा और रामनाथ ठाकुर को मैदान में उतारा। इसके अलावा एक अन्य सीट पर एनडीए समर्थित प्रत्याशी को भी पर्याप्त समर्थन मिला। विपक्षी दलों की ओर से पर्याप्त उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण मुकाबला औपचारिक ही रह गया और सभी प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय हो गया।
बताया गया कि बिहार विधानसभा में एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल होने के कारण विपक्ष के लिए चुनावी चुनौती खड़ी करना मुश्किल था। इसी कारण कई सीटों पर मुकाबला बनने से पहले ही तस्वीर साफ हो गई। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, सभी प्रत्याशियों के नामांकन पत्रों की जांच के बाद किसी भी सीट पर अतिरिक्त उम्मीदवार नहीं रहने के कारण इन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन की रणनीतिक एकजुटता का संकेत है। राज्यसभा में इन सीटों के जुड़ने से केंद्र में एनडीए की स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।
राजनीतिक हलकों में इस परिणाम को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में बढ़ती संख्या से केंद्र सरकार को विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने में सहूलियत मिलती है। बिहार से निर्वाचित नए राज्यसभा सदस्य जल्द ही उच्च सदन में शपथ लेकर अपना कार्यकाल शुरू करेंगे।
