मुजफ्फरनगर, 17 मार्च 2026। जनपद की काली नदी पूर्वी को प्रदूषण से बचाने और जलीय पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नदी के जल के नमूने लेकर वैज्ञानिक विश्लेषण कराने तथा व्यापक कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया गया है।
उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने जानकारी देते हुए बताया कि विकास खंड खतौली के अंतर्गत आने वाले अंतवाड़ा, पलड़ी, रसूलपुर कैलोरा, खोकनी, वाजिदपुर खुर्द, गालिबपुर, जंधेड़ी जाटान, जसौला, सिकंदरपुर खुर्द और कढ़ली गांवों के किनारे बहने वाली काली नदी पूर्वी के संरक्षण को लेकर प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग एवं कृषि विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
बैठक में यह प्रमुख रूप से सामने आया कि कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक वर्षा जल के साथ बहकर नदी में पहुंच रहे हैं, जिससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है और जलीय जीव-जंतुओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए विस्तृत चर्चा की गई।
अधिकारियों ने निर्णय लिया कि नदी किनारे स्थित कृषि भूमि पर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग को कम कर किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही वर्षा के दौरान खेतों से बहने वाले पानी (वॉटर रनऑफ) को रोकने के उपाय भी लागू किए जाएंगे।
इसके अलावा, काली नदी के जल की गुणवत्ता का नियमित परीक्षण कराने के लिए नमूना संग्रहण की व्यवस्था की जाएगी, ताकि प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का आकलन कर प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल नदी का संरक्षण संभव होगा, बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती की दिशा में प्रेरित किया जा सकेगा।

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