शामली, 18 मार्च 2026 । जनपद में लगातार बिगड़ रही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बुधवार को उस समय हालात गरमा गए, जब भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पहुंच गए। आक्रोशित लोगों ने कार्यालय परिसर में घेराव कर धरना शुरू कर दिया और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ तीखी नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। मरीजों को समय पर डॉक्टर नहीं मिलते, दवाइयों का टोटा बना रहता है और जांच सुविधाएं भी लगभग ठप पड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार गंभीर मरीजों को भी घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन उपचार नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
धरने के दौरान भाकियू नेताओं ने स्वास्थ्य विभाग पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि शामली सहित कैराना, ऊन और झिंझाना क्षेत्र के अस्पतालों में व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और अव्यवस्था के कारण गरीब और मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।
सीएमओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया और कर्मचारियों की आवाजाही भी प्रभावित रही। हालांकि सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और भाकियू प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही व्यवस्थाओं की समीक्षा कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
भाकियू नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल किसानों का मुद्दा नहीं बल्कि आम जनता के जीवन से जुड़ा गंभीर सवाल है, जिस पर प्रशासन को तत्काल ध्यान देना होगा।

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