मुजफ्फरनगर/बिजनौर, 19 मार्च 2026। मुजफ्फरनगर और बिजनौर में संचालित बिंदल पेपर्स मिल्स समूह पर आयकर विभाग की कार्रवाई ने पूरे उद्योग जगत में हलचल मचा दी है। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132 के तहत 18 मार्च से शुरू हुई तलाशी अभी भी जारी है और शुरुआती जांच में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
आयकर विभाग को अब तक तीन करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और लगभग पंद्रह करोड़ रुपये के आभूषण बरामद हुए हैं। इसके अलावा जांच में सामने आया है कि कागज उत्पादन से जुड़े कारोबार में कच्चे माल की खरीद में भारी गड़बड़ी की गई। गन्ने की खोई (बैगास) सहित अन्य सामग्री की अघोषित खरीद के साथ करीब पचास करोड़ रुपये की संदिग्ध या फर्जी खरीद के प्रमाण भी मिले हैं।
विभाग को यह भी शक है कि समूह ने कागज और चीनी दोनों क्षेत्रों में वास्तविक मुनाफे को छिपाने के लिए लेखांकन में हेरफेर किया। जांच के दौरान कागज की अघोषित बिक्री के तथ्य भी सामने आए हैं, जिससे कर चोरी की आशंका और मजबूत हो गई है।
सबसे बड़ा मुद्दा 171.3 करोड़ रुपये की उस कटौती को लेकर है, जिसका दावा कंपनी ने आयकर अधिनियम की धारा 80आईए के तहत किया था। प्रारंभिक जांच में यह दावा नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया है और इसे खारिज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
तलाशी के दौरान एक अहम खुलासा यह भी हुआ कि कंपनी की कागज इकाई, विद्युत संयंत्र और चीनी इकाई के लिए अलग-अलग लेखा-पुस्तकें नहीं रखी जा रही थीं। आंतरिक लेखाकार और विद्युत संयंत्र के महाप्रबंधक ने अपने बयानों में इसकी पुष्टि की है। जांच टीम को केवल समेकित लेखा-पुस्तकें और ट्रायल बैलेंस ही मिले हैं, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
फिलहाल आयकर विभाग द्वारा साक्ष्य जुटाने और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। हालांकि कार्रवाई के बावजूद समूह की सभी इकाइयां सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई और कर देनदारी का स्पष्ट निर्धारण किया जाएगा।
