नई दिल्ली, 31 मार्च 26। देश में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ आयकर व्यवस्था और वित्तीय नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा कर प्रणाली को सरल बनाने के उद्देश्य से नई व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसके तहत अब फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जगह ‘टैक्स ईयर’ प्रणाली लागू होगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी हो जाएगी।
नई कर व्यवस्था के अनुसार आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा में भी संशोधन किया गया है। नौकरीपेशा करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है, जबकि व्यापारियों और प्रोफेशनल वर्ग के लिए 31 अगस्त अंतिम तिथि तय की गई है। इसके अलावा करदाता 31 मार्च तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। निर्धारित समय के बाद रिटर्न दाखिल करने पर जुर्माने का प्रावधान भी रहेगा। सरकार का कहना है कि इस नई समय-सीमा से रिटर्न प्रक्रिया व्यवस्थित होगी और करदाताओं को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
नए वित्त वर्ष में शेयर बाजार से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग यानी फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ोतरी की गई है, जिससे इस प्रकार की ट्रेडिंग पहले की तुलना में महंगी हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे निवेशकों पर असर पड़ सकता है, हालांकि सरकार का उद्देश्य सट्टा कारोबार को नियंत्रित करना बताया जा रहा है।
हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA पर टैक्स छूट लेने वाले कर्मचारियों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। आयकर विभाग अब किराया छूट के मामलों में अधिक निगरानी करेगा और कई मामलों में मकान मालिक का पैन नंबर देना अनिवार्य किया जा सकता है। इससे फर्जी किराया रसीद दिखाकर टैक्स छूट लेने के मामलों पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
सरकार ने कुछ क्षेत्रों में करदाताओं को राहत भी दी है। भोजन भत्ता, बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल खर्च से संबंधित टैक्स छूट में वृद्धि की गई है। सड़क दुर्घटना मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स मुक्त रखा गया है। विदेश यात्रा पर स्रोत पर कर संग्रह यानी टीसीएस की दर में भी कमी की गई है, जिससे विदेश यात्रा करने वाले लोगों को कुछ राहत मिलेगी।
निवेश से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। कंपनियों द्वारा शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि को अब कैपिटल गेन की श्रेणी में माना जाएगा। म्यूचुअल फंड या डिविडेंड आय पर लिए गए ऋण के ब्याज पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से जुड़े टैक्स नियमों में भी संशोधन किया गया है।
इसके अलावा सरकार टोल प्लाजा पर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रही है। आने वाले समय में टोल भुगतान केवल फास्टैग या डिजिटल माध्यम से करने की व्यवस्था लागू की जा सकती है और नकद भुगतान करने पर अधिक शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं नए वित्त वर्ष में कुछ रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ लागू हो रहे ये बदलाव देश की कर व्यवस्था, निवेश प्रणाली और डिजिटल भुगतान व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन माने जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
