लखनऊ। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में कार्यरत कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। कर्मचारियों द्वारा वेतन, सेवा शर्तों और कार्य समय को लेकर उठाई गई मांगों के बाद संबंधित एजेंसी ने हेल्पलाइन संचालन करने वाली कंपनी से जवाब तलब किया है और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में कार्यरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें तय मानकों के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है और कई कर्मचारियों को समय पर भुगतान भी नहीं मिल रहा। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे प्रतिदिन बड़ी संख्या में कॉल अटेंड कराई जाती हैं, लेकिन उसके अनुसार वेतन और सुविधाएं नहीं दी जा रहीं। कर्मचारियों ने यह भी मांग उठाई कि उनका वेतन बढ़ाया जाए, समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए, नौकरी की सुरक्षा दी जाए और कार्य समय को निर्धारित किया जाए।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन बढ़ाना, समय पर वेतन भुगतान, ईएसआई और पीएफ की सुविधा, नौकरी से न हटाने की गारंटी, कार्य का निश्चित समय और अवकाश की सुविधा शामिल बताई जा रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से ये समस्याएं चल रही हैं लेकिन समाधान नहीं हो रहा था, जिसके बाद उन्हें अपनी मांग उठानी पड़ी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग ने हेल्पलाइन का संचालन कर रही कंपनी को नोटिस जारी कर पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी महत्वपूर्ण सेवा में किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए और कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए।
अधिकारियों का कहना है कि यदि कंपनी द्वारा कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया या सेवा संचालन में लापरवाही पाई गई तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में कार्यरत कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा और वेतन व सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो सके।

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