लखनऊ/मुजफ्फरनगर, 7 अप्रैल 26। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में नई पंचायतों के गठन को लेकर अब तस्वीर लगभग साफ होती दिख रही है। मौजूदा हालात और अधूरी तैयारियों के बीच संकेत साफ हैं कि इस बार गांव की सरकार का गठन सीधे आगामी विधानसभा चुनाव के बाद ही संभव हो पाएगा।
दरअसल, प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, लेकिन अब तक चुनाव की दिशा में जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। सबसे बड़ी अड़चन पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर बनी हुई है, जिसके लिए न तो आयोग का गठन पूरा हुआ है और न ही सर्वे की प्रक्रिया अंतिम चरण तक पहुंच पाई है।
प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही हैं। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन, वार्डों का पुनर्गठन और आरक्षण निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण कार्य अभी अधूरे हैं। ऐसे में समय की कमी को देखते हुए पंचायत चुनाव निर्धारित अवधि में कराना लगभग असंभव माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा है कि फिलहाल सभी दलों का ध्यान 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों पर केंद्रित है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर के चुनावों को लेकर सक्रियता कम दिखाई दे रही है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि यही स्थिति बनी रहती है तो सरकार पंचायत चुनावों को विधानसभा चुनावों के बाद कराने का रास्ता अपना सकती है। ऐसे में गांवों में नई सरकार बनने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
इधर, इस पूरे मामले पर न्यायालय की नजर भी बनी हुई है। यदि आरक्षण प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती है, तो सरकार को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर या तो मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाना होगा या फिर प्रशासनिक अधिकारियों को पंचायतों का संचालन सौंपना पड़ेगा।

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