धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र हरिद्वार में नगर प्रशासन ने शहर की पारंपरिक और धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए एक अहम निर्णय लिया है। नगर निगम बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि नगर निगम सीमा के भीतर खुलेआम मांस की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी और सभी मीट की दुकानों को शहर से बाहर निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा।
नगर निगम की बैठक में महापौर किरण जैसल की अध्यक्षता में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसमें अधिकांश पार्षदों ने समर्थन जताया। प्रस्ताव के पीछे तर्क दिया गया कि हरिद्वार देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में शहर के भीतर मांस की खुलेआम बिक्री धार्मिक भावनाओं को प्रभावित कर सकती है और इससे स्वच्छता व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
निर्णय के अनुसार, नगर क्षेत्र में संचालित मीट की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से शहर के बाहरी क्षेत्रों—जैसे सराय और अन्य निर्धारित स्थानों—पर शिफ्ट किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल शहर में साफ-सफाई बेहतर होगी, बल्कि सड़कों और बाजारों में आवारा पशुओं की समस्या पर भी नियंत्रण मिलेगा।
इसके साथ ही ऑनलाइन माध्यम से मांस की आपूर्ति पर भी सख्ती बरतने के संकेत दिए गए हैं। संबंधित एजेंसियों और डिलीवरी प्लेटफॉर्म को निर्देशित किया गया है कि नगर निगम क्षेत्र के भीतर इस प्रकार की सप्लाई से बचें, अन्यथा कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित रहेगा। आम नागरिक अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए शहर के बाहर से मांस खरीद सकते हैं, इस पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
इस फैसले को लेकर जहां एक ओर धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है, वहीं कुछ व्यापारियों और पार्षदों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि इस निर्णय से कई लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है और इसके लिए पुनर्वास की ठोस योजना बनाई जानी चाहिए।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। आगामी आयोजनों, विशेषकर अर्धकुंभ को देखते हुए शहर की व्यवस्था को और व्यवस्थित करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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