लखनऊ, 8 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश में चुनावी आहट के बीच अब सियासत सड़कों पर उतर आई है। राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई शहरों में अचानक लगे राजनीतिक पोस्टरों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इन पोस्टरों में एक तरफ मौजूदा सरकार की छवि को “धुरंधर” बताते हुए प्रस्तुत किया गया है, वहीं दूसरी ओर पूर्व सरकार को “ल्यारी राज” से जोड़ते हुए निशाना साधा गया है।
राजधानी के प्रमुख चौराहों, दीवारों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए इन पोस्टरों में कानून-व्यवस्था और अपराध के मुद्दे को केंद्र में रखकर तुलना करने की कोशिश की गई है। पोस्टरों के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि वर्तमान शासन में अपराध पर नियंत्रण मजबूत हुआ है, जबकि पूर्व कार्यकाल को अपराध और अव्यवस्था से जोड़कर दिखाया गया है।
जानकारी के अनुसार यह पोस्टर अभियान केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेठी, बाराबंकी, सीतापुर, नोएडा और पूर्वांचल के कई जिलों में भी इसी तरह के पोस्टर देखे गए हैं। पोस्टरों में प्रयुक्त भाषा और चित्रण ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है और इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनमत को प्रभावित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
इन पोस्टरों के सामने आने के बाद विपक्षी खेमे में नाराजगी साफ नजर आ रही है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और भ्रामक प्रचार बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के पोस्टर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकते हैं और चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।
दूसरी ओर, पोस्टर लगाने वाले समूहों का दावा है कि यह अभियान जनता को पिछले और वर्तमान शासन के बीच अंतर बताने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी प्रमुख राजनीतिक दल ने इन पोस्टरों की जिम्मेदारी नहीं ली है, जिससे इस पूरे मामले में रहस्य बना हुआ है।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई स्थानों से पोस्टर हटवा दिए हैं।

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