नई दिल्ली/कोलकाता, 8 अप्रैल 2026। देश के पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों के बीच चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए कड़ा फैसला लिया है। आयोग ने आदेश जारी करते हुए 9 अप्रैल की सुबह 7 बजे से 29 अप्रैल की शाम 6:30 बजे तक एग्जिट पोल के प्रसारण और प्रकाशन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इस अवधि के दौरान किसी भी टीवी चैनल, डिजिटल प्लेटफॉर्म, वेबसाइट या सोशल मीडिया पर एग्जिट पोल से जुड़ी कोई भी सामग्री दिखाना या साझा करना कानूनन अपराध माना जाएगा।
निर्वाचन आयोग का मानना है कि अलग-अलग चरणों में होने वाले मतदान के बीच एग्जिट पोल का प्रसारण मतदाताओं के मन पर असर डाल सकता है, जिससे चुनाव की पारदर्शिता और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण यह निर्णय लिया गया है कि अंतिम चरण का मतदान पूरा होने तक किसी भी तरह का अनुमान या परिणाम सार्वजनिक न किया जाए।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत लागू किया गया है। यदि कोई संस्था या व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की सजा और जुर्माना दोनों शामिल हो सकते हैं। आयोग ने विशेष रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेताया है कि वे इस अवधि में किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल से संबंधित कंटेंट को प्रसारित होने से रोकें।
इस निर्णय का असर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हो रहे चुनावों पर पड़ेगा, जहां मतदान कई चरणों में कराया जा रहा है। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी चरणों के मतदाता बिना किसी दबाव या भ्रम के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
वहीं पश्चिम बंगाल को लेकर आयोग ने अतिरिक्त सतर्कता बरती है। राज्य में चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। कोलकाता में एक हाईटेक कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से पूरे राज्य की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई है, जबकि सभी मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों और वेबकास्टिंग के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है।
सूत्रों के मुताबिक आयोग ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि कहीं गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। साथ ही त्वरित प्रतिक्रिया के लिए विशेष टीमों को भी सक्रिय रखा गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
पश्चिम बंगाल में मतदान 23 और 29 अप्रैल को प्रस्तावित है, जबकि सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में आयोग का यह कड़ा रुख यह संकेत देता है कि इस बार चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावमुक्त बनाने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है।

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