मुजफ्फरनगर : देशभर में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संचालित स्वच्छ पेयजल योजनाओं का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित पानी मिल सके और उन्हें दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े। इन योजनाओं के तहत गांवों में पानी की टंकियां, पाइपलाइन नेटवर्क और नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करने का दावा किया जाता है, जिससे जनस्वास्थ्य में सुधार हो सके।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है। जनपद मुजफ्फरनगर के मोरना क्षेत्र के ककराला गांव में यह योजना पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। यहां पेयजल टंकी से गांव में सप्लाई बंद कर दी गई है, जबकि उसी पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई के लिए खुलेआम किया जा रहा है।
इस पूरे मामले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि टंकी का पानी पाइप के जरिए खेतों की ओर बहाया जा रहा है, जबकि गांव के घरों में लगे नल सूखे पड़े हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जलकल विभाग की लापरवाही और संभावित मिलीभगत के चलते यह स्थिति बनी हुई है। बताया गया कि “कई दिनों से घरों में पानी नहीं आ रहा है। जबकि सरकारी टंकी का पानी खेतों में जा रहा है।”
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब वायरल वीडियो के सामने आने के बाद गांव में आक्रोश और भी बढ़ गया है।
भीषण गर्मी के बीच गहराते जल संकट ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की गई और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं की क्रियान्वयन प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह लापरवाही के चलते जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है।
