मुजफ्फरनगर, 9 अप्रैल 26। जनपद में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और मनमानी वसूली के खिलाफ गुरुवार को माहौल गरमा गया। शिवसेना के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ता और अभिभावक सड़कों पर उतर आए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
अभिभावकों का दर्द साफ झलक रहा था। उनका कहना है कि अब बच्चों की पढ़ाई “शिक्षा” नहीं बल्कि “महंगा सौदा” बन गई है। छोटे बच्चों की पढ़ाई के लिए ही किताबों पर 4 से 5 हजार रुपये तक खर्च कराया जा रहा है। यही नहीं, हर साल दोबारा एडमिशन फीस के नाम पर भी 4 से 5 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
इसके साथ ही मासिक स्कूल फीस कम से कम 2 हजार रुपये से शुरू हो रही है, जिससे आम परिवारों की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी है। एक बच्चे की पढ़ाई पर सालभर में हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे अभिभावक परेशान और आक्रोशित हैं।
प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाया गया कि कई स्कूल अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। बाजार में सस्ती सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें महंगे दामों पर खरीदना पड़ता है, जिससे शोषण की स्थिति पैदा हो रही है।
शिवसेना के जिला अध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस लूट पर लगाम नहीं लगी तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि फीस की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए और अभिभावकों को राहत दी जाए।
प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई। इस दौरान प्रमोद अग्रवाल, जतिन बशिष्ठ सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
जनपद में इस मुद्दे को लेकर अब माहौल गरमा चुका है और अभिभावक प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
