मुजफ्फरनगर, 10 अप्रैल 2026। जनपद में बाल विवाह पर पूर्ण रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह कराना एक दण्डनीय अपराध है और इसमें शामिल सभी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि किसी भी बालिका जिसकी आयु 18 वर्ष से कम हो तथा किसी भी बालक जिसकी आयु 21 वर्ष से कम हो, उनका विवाह कराना कानूनन प्रतिबंधित है। इस अधिनियम के अनुसार बाल विवाह कराने वाले वयस्क, विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित, मौलवी या अन्य संबंधित व्यक्तियों के लिए दो वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुरीति है, जिसके शारीरिक और मानसिक दुष्परिणाम बच्चों के जीवन पर लंबे समय तक असर डालते हैं। विशेष रूप से अक्षय तृतीया के अवसर पर पारंपरिक रूप से बाल विवाह की घटनाएं सामने आती रही हैं। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को पड़ रहा है, जिसके मद्देनजर प्रशासन ने जनपद में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि विवाह से जुड़े सभी व्यवसायों—जैसे प्रिंटिंग प्रेस, टेंट व्यवसायी, मैरिज हॉल संचालक, बैंड-बाजा, कैटरर्स, फोटोग्राफर, पुरोहित और मौलवी—को यह सुनिश्चित करना होगा कि विवाह में शामिल वधु और वर की आयु निर्धारित सीमा से कम न हो। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 या नजदीकी पुलिस थाना/चौकी को सूचित करें, ताकि समय रहते इस कुप्रथा को रोका जा सके।
