कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल तेज हो गया है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपना चुनावी घोषणा पत्र, जिसे “संकल्प पत्र” या “भरोसे का पत्र” कहा जा रहा है, जारी कर दिया है। इस घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए ₹3000 प्रतिमाह आर्थिक सहायता देने का बड़ा वादा किया गया है, जिसने चुनावी बहस को और तेज कर दिया है।
घोषणा पत्र में भाजपा ने महिला सशक्तिकरण को प्रमुख एजेंडा बनाते हुए कहा है कि राज्य में सरकार बनने पर सभी पात्र महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से हर महीने ₹3000 की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके साथ ही महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण, राज्य में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे कई वादे भी शामिल किए गए हैं।
भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने, अवैध घुसपैठ पर सख्ती से रोक लगाने तथा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं लागू करने की भी बात कही है। पार्टी का दावा है कि इन कदमों से राज्य में निवेश बढ़ेगा और युवाओं को रोजगार मिलेगा।
वहीं, ममता बनर्जी ने भाजपा के इन वादों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जनता को “खोखले वादों” से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन उन्हें धरातल पर लागू करने में विफल रहती है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि उनकी सरकार पहले से ही महिलाओं और गरीबों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बंगाल चुनाव में महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता योजनाएं प्रमुख मुद्दा बन सकती हैं। भाजपा का ₹3000 प्रतिमाह का वादा सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल की योजनाओं को चुनौती देता नजर आ रहा है।
फिलहाल, दोनों प्रमुख दलों के बीच बयानबाजी तेज हो चुकी है और चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होता जा रहा है। अब देखना होगा कि जनता किसके वादों पर भरोसा जताती है।
