मुजफ्फरनगर। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित कृषि व्यापार समझौते के विरोध में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की धरती एक बार फिर आंदोलन की आहट से गूंज उठी। गुरुवार को जनपद मुख्यालय पर सैकड़ों किसानों ने जोरदार प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि समझौता वापस नहीं लिया गया तो वे गांव-गांव में इसकी प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराएंगे।
प्रदर्शन का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने किया। आंदोलनकारी किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और मोटरसाइकिलों से कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
भाकियू जिला अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि यह समझौता देश के छोटे और मध्यम किसानों के हितों के प्रतिकूल है। उनका आरोप है कि विदेशी कृषि उत्पादों के आयात में छूट मिलने से गन्ना, गेहूं और दलहन उत्पादकों को बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
किसान नेता राजपाल सिंह मलिक और संगठन के युवा जिला संयोजक अमित राठी ने संयुक्त बयान में कहा कि “हम अपने खेत और फसल को किसी भी सूरत में कॉरपोरेट या विदेशी दबाव के हवाले नहीं होने देंगे।” उन्होंने 15 फरवरी से तहसील स्तर पर पंचायतें आयोजित करने तथा गांवों में जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल तैनात रहा, हालांकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन को शासन स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया है।
किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ तो आगामी सप्ताह में राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना-प्रदर्शन और प्रतीकात्मक रूप से समझौते की प्रतियां जलाकर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
