चौधरी चरण सिंह मेरठ । शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने बड़ी पहल की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नए शैक्षणिक सत्र से चार वर्षीय संयुक्त स्नातक-शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने की घोषणा की है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब विद्यार्थियों को अलग-अलग स्नातक और शिक्षक प्रशिक्षण करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत कला और विज्ञान वर्ग के विद्यार्थी सीधे बारहवीं के बाद प्रवेश लेकर चार वर्ष में ही विषय अध्ययन के साथ-साथ शिक्षण प्रशिक्षण पूरा कर सकेंगे। पहले जहां विद्यार्थियों को तीन वर्ष का स्नातक और उसके बाद दो वर्ष का शिक्षक प्रशिक्षण करना पड़ता था, वहीं अब यह प्रक्रिया एकीकृत रूप में पूरी होगी।
पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को अपने विषय की गहन पढ़ाई के साथ शिक्षण विधियों, कक्षा संचालन, पाठ योजना निर्माण, मूल्यांकन पद्धति और बाल मनोविज्ञान का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही विद्यालयों में निर्धारित अवधि तक अनिवार्य प्रशिक्षण भी कराया जाएगा, ताकि अभ्यर्थी वास्तविक परिस्थितियों में अध्यापन का अनुभव प्राप्त कर सकें।
प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत सम्पन्न होगी। बारहवीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी, तय अंकों की पात्रता पूरी करने पर आवेदन कर सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस नई पहल से प्रदेश में प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या बढ़ेगी और विद्यालयों को बेहतर गुणवत्ता वाले शिक्षक मिल सकेंगे।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। मेरठ और आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को अब शिक्षक बनने के लिए अन्य शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। विश्वविद्यालय परिसर में तैयार की गई नई शैक्षणिक व्यवस्था से क्षेत्र में उच्च शिक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
