मुज़फ्फरनगर। जनपद में Refuse Derived Fuel (RDF) के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे पर्यावरणीय सवालों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गंभीर चिंता जताई है। ट्रिब्यूनल ने मामले को जनस्वास्थ्य से जुड़ा बताते हुए जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निकाय से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि RDF के जलने से निकलने वाला धुआं आसपास के गांवों और रिहायशी इलाकों में फैल रहा है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसके साथ ही भूजल और पेयजल स्रोतों के दूषित होने की भी शिकायतें सामने आई हैं।
सुनवाई के दौरान एनजीटी की पीठ ने जिलाधिकारी मुज़फ्फरनगर को निर्देश दिए कि RDF के स्रोत, इसके भंडारण, उपयोग और निगरानी व्यवस्था की पूरी जानकारी अदालत के समक्ष रखी जाए। वहीं उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को औद्योगिक इकाइयों में लगे प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों, उत्सर्जन स्तर और नियमों के अनुपालन की जांच करने को कहा गया है।
नगर पालिका को पेयजल के नमूनों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद जिले में RDF से जुड़े सभी मामलों पर प्रशासनिक निगरानी और सख्त हो गई है।


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