नई दिल्ली: उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव-रहित माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने कहा है कि जब तक मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक वर्ष 2012 के पुराने नियम ही लागू माने जाएंगे।
UGC ने हाल ही में एक नया नियामक ढांचा जारी किया था, जिसके तहत देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में “समान अवसर केंद्र”, “इक्विटी कमेटी” और सशक्त शिकायत निवारण प्रणाली बनाना अनिवार्य किया गया था। इसका उद्देश्य जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, सामाजिक पृष्ठभूमि या दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना बताया गया था।
लेकिन इन नियमों के खिलाफ कई याचिकाएँ दायर हुईं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियमों में प्रयुक्त शब्दावली व्यापक और अस्पष्ट है, जिससे इनके गलत उपयोग या असंतुलित क्रियान्वयन की आशंका बन सकती है। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान माना कि नियमों की व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति है, इसलिए इन्हें फिलहाल लागू करना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि नए नियम संशोधन के साथ लागू किए जाएँ या पूरी तरह से पुनः तैयार किए जाएँ। तब तक देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को 2012 की व्यवस्था के अनुसार ही कार्य करना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Join WhatsApp Group