कानपुर में उस समय माहौल गर्मा गया जब नवाबगंज थाना पुलिस ने कानपुर बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को एक पुराने आपराधिक मामले की जांच के तहत पूछताछ के लिए थाने बुलाया। जैसे ही यह खबर अधिवक्ता समुदाय तक पहुँची, बड़ी संख्या में वकील थाने के बाहर जुटने लगे और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
अधिवक्ताओं का कहना था कि बिना पर्याप्त साक्ष्य और नोटिस के किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को थाने लाना अनुचित है। उन्होंने इसे बार के सम्मान से जुड़ा विषय बताया। उधर पुलिस अधिकारियों का पक्ष था कि वर्ष 2021 के एक लंबित हत्या प्रकरण की पुनः जांच के दौरान कुछ नाम सामने आए थे, जिनसे तथ्यों की पुष्टि के लिए पूछताछ की जानी आवश्यक थी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यह औपचारिक गिरफ्तारी नहीं थी, बल्कि पूछताछ की नियमित प्रक्रिया थी।
स्थिति बिगड़ती देख मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल, क्षेत्राधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी पहुँचे। लगभग छह से सात घंटे तक चले गतिरोध और बातचीत के बाद राकेश तिवारी को थाने से जाने दिया गया, जिसके बाद माहौल शांत हुआ।
बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई दोहराई गई तो व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा। वहीं पुलिस प्रशासन ने कहा कि जांच कानून सम्मत तरीके से आगे बढ़ेगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

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